Friday, June 20, 2008

मंद जळती लेखणी

स्वप्नं, स्वप्नं राहिलेली बरी
नाहीतर डोळ्यांना बोचतात
पापण्यातच दडलेली बरी
नाहीतर आसवांतून तरळतात

आकाशात उडू नये म्हणे उंच
कधी एकदम पडायला होतं
हसत रहावं म्हणे खुप खुप
कधी एकदम रडायला होतं

प्रेम करून पहावं नक्कीच
ते जाताना किंमत कळते
एकटं राहून पहावं नक्कीच
जीवलगांची किंमत कळते

कितीही काहीही वाटलं तरी
फ़ार असं लिहू नये म्हणतात
मंद मंद जळत रहाते लेखणी
लोकं वा वा करून सटकतात

Thursday, June 19, 2008

कोहरा

जिंदगी मे दांव पर लगे, रोज नये मोहरे हैं
कभी खुला आसमां, कभी हर तरफ़ कोहरें हैं

खुशी मिली थी , उसके साथ चल न सका
इतनी पास थी , हाथ पकड चल न सका
अब बस गुमनाम साहिल पे टकराती लहरें हैं
..

आईना देखकर पूछा , क्या यहीं हूं मै
बस यही सोचता रहा , क्या सही हूं मै
आनेवाले सभी लम्होंके, अजनबी से चेहरे हैं
..

थोडा सयाना, थोडा दिवाना , बच्चे सा दिल
थोडा बेगाना, थोडा झूठा, थोडा सच्चे सा दिल
कोई गलती ना करे , इसलिए लगाए थोडे पहरें है
...

Tuesday, June 17, 2008

कुछ घंटे ...

कुछ घंटे हुए है तुम्हारी आवाज सुने
क्यूं लगता है सदियां गुजर गई
जीने के लिए आज राशन न मिला
नब्ज जाने कहां आके ठहर गई

यूं लगता है तुम साथ साथ ही हो
रुठे हो , अभी हसोगे , थोडी बात भी हो
पर .. पर..
रतजगे से ख्वाब झटक दिए सब
हंसती हूई यादोंसे आंख भर गई
कुछ घंटे ...

इतना दूर न रहो के कुछ बात न हो
यहां तुम न रहो तो ये कायनात न हो
पर .. पर..
सुबह सुबह शायद तुम मिलो
ख्वाब पलकों मे ये रात भर गई
कुछ घंटे ...

Monday, June 9, 2008

खुबसुरत चोरी

नकाब उठाईये, जरा पर्दे गिराईये
हसरत है जो आंखोमे, जुबां पे लाईये ..

न होगा हमसे वफ़ा का झूठा सलाम
लौटके जब न हो जाना , तब ही आईये ...

तमन्ना है तुम्हे छुपा के रखु कही
खुद ही आकर इन पलकोंको सजाईये...

दुनियाकी क्यू बिनवजह फ़िक्र है तुम्हे
ये खुबसुरत चोरी सामने से कर जाईये ..

--- अभिजित ...

Wednesday, June 4, 2008

आज कल ख्वाब भी नये है

आज कल ख्वाब भी नये है
किसी ने अभी अभी बोये है
क्यू जगा रहे हो हमे यारों
कुछ चंद पल ही तो सोये है

पलकोंके आसपास कहीं
एक जगह वो खास कहीं
वहीं छुपे कुछ हमसाये है....
आज कल...

आकाश जितना ऊंचा ख्वाब
जमींसे है उम्दा सिंचा ख्वाब
खुशी से बादल भी रोये है...
आज कल...

धुंधला सा कोहरा हल्का सा
बूंद बूंद सपना छल्का सा
रोज इसी मोड पे खोए है...
आज कल...


--- अभिजित गलगलीकर ..... ४-६-०८ .....