स्वप्न बघावे हवे ते
शोधावे सदा नवे ते
असंही काही वाचावे
डोळ्यांत न मावे ते
रडावे हसून उरेल ते
बोलावे बोल सुरेल ते
अलगद शब्द स्फ़ुरावे
लिहावे मनी उमटेल ते
स्मरावे जे हसवेल ते
द्यावे कधी न संपेल ते
अस्तित्व असे असावे
नसणे ज्याचे जाणवेल ते
I am as elusive, as you allow me to be.. I am as opaque, as you read me more.. I am as possesive, as you claim on me.. I am as fluent, as you ease me.. I am as impossible, as memories try to erase me ..
Thursday, March 12, 2009
Tuesday, March 10, 2009
कैसे मुझे ऊ मिल गयी
कैसे मुझे ऊ मिल गयी
सर से जाये ना खुजली
मुझे आता नही शांपू पे अपनी यकीं
कैसे मुझको मिली ऊ ...
...
अनचाहे शख्स की तरह से महफ़िल मे तुम
डसके मुझे भागी हो यूं ..
हसूं तुमपे या मै रोऊं
छिना है सुकूं, कैसे मै रूकूं
क्यू अब यहां आई तुम ...
बदले शांपू, बदली कंघी
बदली बालोंकी क्रीम..
पले बालों मे जिंदगी नयी
बेकार गयी हर स्कीम..
मिली है चैन को विदा..
पर ये रहेंगी सदा
उसी तरह मेरी बालों मे खाट डालके
हर लम्हा, हर पल ..
जिंदगी पिटारा हो गयी
खिटपिट खटारा हो गयी
मुझे आता नही शांपू पे अपनी यकीं
कैसे मुझको मिली ऊ .........
सर से जाये ना खुजली
मुझे आता नही शांपू पे अपनी यकीं
कैसे मुझको मिली ऊ ...
अनचाहे शख्स की तरह से महफ़िल मे तुम
डसके मुझे भागी हो यूं ..
हसूं तुमपे या मै रोऊं
छिना है सुकूं, कैसे मै रूकूं
क्यू अब यहां आई तुम ...
बदले शांपू, बदली कंघी
बदली बालोंकी क्रीम..
पले बालों मे जिंदगी नयी
बेकार गयी हर स्कीम..
मिली है चैन को विदा..
पर ये रहेंगी सदा
उसी तरह मेरी बालों मे खाट डालके
हर लम्हा, हर पल ..
जिंदगी पिटारा हो गयी
खिटपिट खटारा हो गयी
मुझे आता नही शांपू पे अपनी यकीं
कैसे मुझको मिली ऊ .........
Monday, March 2, 2009
छोटीशी शब्दभेट
सुमंगल नात्याची
सोनसळी पहाट
अथांग स्वप्नांचा
अनिमिष थाट
रुपेरी वचनात
बोलका आनंद
बंधनं तोडून
सजला मुक्तछंद
प्रथमेषाला वंदून
सुरु्वात प्रवासाची
सहजच लाभेल
साथ उत्कर्षाची
नवे सूर,नवी तान
नवे कोवळे तराणे
छान जुळुन येईल
सुरेल जीवनगाणे
दादा - वहिनीला साक्षगंधानिमित्य छोटीशी शब्दभेट ..
सोनसळी पहाट
अथांग स्वप्नांचा
अनिमिष थाट
रुपेरी वचनात
बोलका आनंद
बंधनं तोडून
सजला मुक्तछंद
प्रथमेषाला वंदून
सुरु्वात प्रवासाची
सहजच लाभेल
साथ उत्कर्षाची
नवे सूर,नवी तान
नवे कोवळे तराणे
छान जुळुन येईल
सुरेल जीवनगाणे
दादा - वहिनीला साक्षगंधानिमित्य छोटीशी शब्दभेट ..
Thursday, February 26, 2009
कुछ अजीब सा..
कोरे कोरे नसीब पे लिख दूं कुछ अजीब
रूठे पल हस देंगे, सूझी है नय़ी तरकीब ..
लगता है उलझा हूं थोडा, सुलझा कुछ हू
इतना यकीं है, आ गया हू खुद के करीब
दिल के अंदाज बदलते है मौसम की तरह
वही उसका एक दोस्त है, वही एक रकीब
छुपते छिपाते कब तर फ़िरते रहेंगे हम
अब साथ हसता गाता चलेगा मेरा नसीब
जब जब कुछ मिले, उतना ही देते चलो
कल जरूर कहोगे, सच कहता था वो गरीब
रूठे पल हस देंगे, सूझी है नय़ी तरकीब ..
लगता है उलझा हूं थोडा, सुलझा कुछ हू
इतना यकीं है, आ गया हू खुद के करीब
दिल के अंदाज बदलते है मौसम की तरह
वही उसका एक दोस्त है, वही एक रकीब
छुपते छिपाते कब तर फ़िरते रहेंगे हम
अब साथ हसता गाता चलेगा मेरा नसीब
जब जब कुछ मिले, उतना ही देते चलो
कल जरूर कहोगे, सच कहता था वो गरीब
Wednesday, February 18, 2009
आयुष्याचं कोडं
आयुष्याचं कोडं आहे
कोड्यात आहेत
विचारांची एककं ..
मग समोर येतात
विचारांचे प्रकार
प्रश्नांचे आकार
ओळखिचे नकार
अलिप्त रुकार ..
निवडायचं असतं
शांत एक उत्तर..
मग विचार सोडून
त्यालाच आयुष्य
बनवायचं असतं ..
कोड्यात आहेत
विचारांची एककं ..
मग समोर येतात
विचारांचे प्रकार
प्रश्नांचे आकार
ओळखिचे नकार
अलिप्त रुकार ..
निवडायचं असतं
शांत एक उत्तर..
मग विचार सोडून
त्यालाच आयुष्य
बनवायचं असतं ..
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