चलता रहता हूं इस साहिल पे
आपकी यादें लहरें बनकर मिलती है
देखता रहता हूं उस फ़लक को
जहां आप चांदनी बनकर मिलती है
यादें तो बन चुकी है साया मेरा
धीरे से पिछे पिछे चलती है
मुडके देखूं तो कोई नही रहता
यूंही मुझे तरसाती रहती है
इस गीली सी रेत पर मै खडा
पांव के निचे से वो सरकती हुई
विश्वास है मेरे ही बनोगे तुम
फ़िर भी लगता है जाँ छुटती हुई ..
I am as elusive, as you allow me to be.. I am as opaque, as you read me more.. I am as possesive, as you claim on me.. I am as fluent, as you ease me.. I am as impossible, as memories try to erase me ..
Wednesday, May 28, 2008
Sunday, May 18, 2008
सुरमई साद..
सुरमई साद , नवीन क्षणांची
कोवळी उब, उगवत्या किरणांची
मुक्त रंग उधळत दिवस उमलला
चिंब भिजत नखशिखांत सजला
मंगल वर्षा होतेय स्वप्नसुमनांची
सुरमई ...
सावळी सांज लाजत सावरत येते
अवखळ अल्लड,धुंद बावरत येते
ऎकवते आठवण निर्मळ कवनांची
सुरमई ...
हळवी रात्र जागवी अलवार स्वप्नं
पळभर न चैन, उधळी स्मृतीरत्नं
सांगते गोष्ट दोन हळूवार मनांची
सुरमई ...
कोवळी उब, उगवत्या किरणांची
मुक्त रंग उधळत दिवस उमलला
चिंब भिजत नखशिखांत सजला
मंगल वर्षा होतेय स्वप्नसुमनांची
सुरमई ...
सावळी सांज लाजत सावरत येते
अवखळ अल्लड,धुंद बावरत येते
ऎकवते आठवण निर्मळ कवनांची
सुरमई ...
हळवी रात्र जागवी अलवार स्वप्नं
पळभर न चैन, उधळी स्मृतीरत्नं
सांगते गोष्ट दोन हळूवार मनांची
सुरमई ...
Tuesday, May 13, 2008
निःशब्द कविता
कोवळी, मनसोवळी तू
अलवार सोनसळी तू
करवंदी , जास्वंदी तू
सुवासिक मृद्गंधी तू
सावनी , अस्मानी तू
सौंदर्य आरस्पानी तू
आशा , अभिलाषा तू
स्वप्नांची परिभाषा तू
माझी निःशब्द कविता तू
ओतप्रोत भाव-सरिता तू
-- अभिजित ... १३-५-०८ ..
अलवार सोनसळी तू
करवंदी , जास्वंदी तू
सुवासिक मृद्गंधी तू
सावनी , अस्मानी तू
सौंदर्य आरस्पानी तू
आशा , अभिलाषा तू
स्वप्नांची परिभाषा तू
माझी निःशब्द कविता तू
ओतप्रोत भाव-सरिता तू
-- अभिजित ... १३-५-०८ ..
Sunday, May 11, 2008
तस्वीर बनाता हूं - विडंबन
एक अजून विडंबन घेऊन हजर बघा ....
...
तस्वीर बनाता हू .. तस्वीर नही बनती .. इक ख्वाबसा देखा है .. ताबीर नही बनती ... तलत मेहमूदचं दैवी गाणं ऍक्चुअली .. त्याची माफ़ी अगोदर... त्याचा स्वभाव थोडा तापट होता म्हणे .. हे खालचं वाचून मला एखाद्या तस्वीरमधे बांधून नदीत फ़ेकलं असतं त्यानी ..
...
असो आपल्यामधे बऱ्याच जणांना शाळेमधे चित्रकला हा अत्यंत गनिमी विषय छळून गेला असेल ... माझी आणि तुमचीही.. ही कहाणी समजा ...
...
दिनभर बनाता हूं तस्वीर नही बनती
छास कभी एकदम पनीर नही बनती
बेदर्द कॅनव्हास का इतना सा है अफ़साना
गाय लगे भैंस , खुदको मैने न पहचाना
इसे और बिगाडने की तदबीर नही बनती
व्हाईटनर लेके मेरी दुनिया मे चले आओ
रोते हुए चित्रों को फ़िरसे थोडा हसा जाओ
मुझसे तो अब ये हालत देखी नही बनती
दिनभर बनाता हूं तस्वीर नही बनती
छास कभी एकदम पनीर नही बनती .....
-- अभिजित रेघोट्यामारे ... ( दिनांक < सद्य वेळ )
तस्वीर बनाता हू .. तस्वीर नही बनती .. इक ख्वाबसा देखा है .. ताबीर नही बनती ... तलत मेहमूदचं दैवी गाणं ऍक्चुअली .. त्याची माफ़ी अगोदर... त्याचा स्वभाव थोडा तापट होता म्हणे .. हे खालचं वाचून मला एखाद्या तस्वीरमधे बांधून नदीत फ़ेकलं असतं त्यानी ..
असो आपल्यामधे बऱ्याच जणांना शाळेमधे चित्रकला हा अत्यंत गनिमी विषय छळून गेला असेल ... माझी आणि तुमचीही.. ही कहाणी समजा ...
दिनभर बनाता हूं तस्वीर नही बनती
छास कभी एकदम पनीर नही बनती
बेदर्द कॅनव्हास का इतना सा है अफ़साना
गाय लगे भैंस , खुदको मैने न पहचाना
इसे और बिगाडने की तदबीर नही बनती
व्हाईटनर लेके मेरी दुनिया मे चले आओ
रोते हुए चित्रों को फ़िरसे थोडा हसा जाओ
मुझसे तो अब ये हालत देखी नही बनती
दिनभर बनाता हूं तस्वीर नही बनती
छास कभी एकदम पनीर नही बनती .....
-- अभिजित रेघोट्यामारे ... ( दिनांक < सद्य वेळ )
तब बात बनी...
ख्वाबों की सब्जी, तमन्नाओं की चटनी
सच्चाई का तडका लगा, तब बात बनी
ये पल मे खुश रहो, आनेवालेका क्या पता
गम को लाथ मारो, जानेवालेकी क्या खता
रोते रोते फ़ट से हस दिया ,तब बात बनी
इस दिल ने बडा तरसाया, अब क्या कहूं
रुलाया हसाया बहकाया , सब क्या कहूं
खुल्ला आजाद छोड दिया, तब बात बनी
आज कल यूंही चांद का ख्वाब देखता हूं
वो तो सिर्फ़ हसता है, मै भी हस देता हूं
अब सब, रब पे छोड दिया, तब बात बनी
--- अभिजित गलगलीकर .... ११ - ५ - २००८
सच्चाई का तडका लगा, तब बात बनी
ये पल मे खुश रहो, आनेवालेका क्या पता
गम को लाथ मारो, जानेवालेकी क्या खता
रोते रोते फ़ट से हस दिया ,तब बात बनी
इस दिल ने बडा तरसाया, अब क्या कहूं
रुलाया हसाया बहकाया , सब क्या कहूं
खुल्ला आजाद छोड दिया, तब बात बनी
आज कल यूंही चांद का ख्वाब देखता हूं
वो तो सिर्फ़ हसता है, मै भी हस देता हूं
अब सब, रब पे छोड दिया, तब बात बनी
--- अभिजित गलगलीकर .... ११ - ५ - २००८
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